स्थापना :

सन १८९५, देश में राष्ट्रीय एंव सामाजिक जागरण का काल था | इसी वर्ष राष्ट्रीय महासभा नाम की संस्था स्थापित हुई | चिंतनशील युवा व्यक्तियों के मन में जागृति पैदा हुई कि जैन धर्म की प्रभावना और भगवान महवीर के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य सीमित दायित्व से नहीं हो सकता, यह सोचकर १८९९ में आपसी विचार-विमर्शकर युवाओं के नाम के अनुरुप 'जैन यंगमैन एसोसिएशन' नाम की संस्था स्थापित हुई | स्थापना के दस वर्ष पश्चात जयपुर अधिवेशन में देश भर से सैकडों लोगों ने भाग लिया | इस अधिवेशन में इस संस्था का नाम सर्वानुमति से बदलकर 'आल इंडिया जैन एसोसिएशन' अर्थात भारत जैन महमंडल कर दिया गया |


प्रथम अधिवेशन में पारित प्रस्ताव

प्रथम अधिवेशन में पारित प्रस्ताव
'जाति या आम्नाय, सम्प्रदाय तथा पंथ का भेदभाव मिटाकार केवल जैन मात्र में पारस्परिक भ्रातृ संबंधों का प्रचार - प्रसार करना एसोसिएशन का लक्ष्य रहेगा |'